गणेश जी की आरती | Ganesh Ji Ki Aarti

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एकदंत दयावंत चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥

अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया।
बूझन को बुद्धि देत निर्धन को माया॥

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥

पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डूवन का भोग लगे संत करें सेवा॥

और चढ़े मेवा संत करें सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥


गणेश आरती का अर्थ

भगवान गणेश की यह आरती हमें सिखाती है कि वे सभी विघ्नों का नाश करने वाले हैं।
जो भी भक्त सच्चे मन से इनकी आरती करता है, उसके जीवन से अंधकार और बाधाएँ दूर हो जाती हैं।
भगवान गणेश ज्ञान, बुद्धि और सफलता के देवता हैं।

गणेश जी की पूजा विधि

  1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएँ।
  3. चंदन, फूल, दूर्वा, मोदक और लड्डू अर्पित करें।
  4. “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 11 बार जप करें।
  5. आरती करें और परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

🙏 गणेश आरती का महत्व

गणेश जी की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, बुद्धि की वृद्धि, और सफलता प्राप्त होती है।
हर शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करने पर सभी कार्य सफल होते हैं।


💫 समापन

गणेश जी की आरती केवल एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि यह आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
हर सुबह या शुभ अवसर पर इस आरती का गायन करें और विघ्नहर्ता गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त करें।
“गणपति बप्पा मोरया!”